Wednesday, December 12, 2018

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को मिली जीत, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रस्तावित महागठबंधन में राहुल गांधी को अगली क़तार में लाकर खड़ा कर दिया है.
तेलंगाना में मिली नाकामी ने भले ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की धार कम कर दी हो लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए के ख़िलाफ़ राज्यवार गठजोड़ बनाने की शुरुआत कर दी है.
कांग्रेस पार्टी की कमान औपचारिक तौर पर संभाले हुए राहुल गांधी के एक साल पूरे हो गए हैं.
और तब से अब तक कांग्रेस के अंदर और बाहर दोनों ही मोर्चों पर राहुल गांधी का क़द यक़ीनन बढ़ा है.
साल 2014 के बाद पहली बार मोदी-शाह की बीजेपी राहुल की कांग्रेस के हाथों सीधे मुक़ाबले में हारी है.
राहुल गांधी पर अब इस बात का दबाव बढ़ेगा कि वे ख़ुद को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर पेश करें या क्षेत्रीय पार्टियों का गठजोड़ खड़ा करने की पहल करें.
उनके सामने ये दोनों ही रास्ते हैं और दोनों ही विकल्पों के अपने-अपने ख़तरे भी हैं.
अब सब की निगाहें बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती की तरफ़ होंगी.
सवाल ये भी है कि क्या वे दूसरी बार राहुल गांधी के साथ तालमेल करने के लिए तैयार होंगी?
कांग्रेस का दामन थामने को लेकर मायावती की हिचकिचाहट कोई नई बात नहीं है.
कांग्रेस की कामयाबी से मायावती और महागठबंधन के बीच दूरियां बढ़ने और बसपा के एनडीए ख़ेमे में जाने के आसार बनते दिख रहे हैं.
हालांकि मायावती एनडीए का दामन थामेंगी, ये कहना जितना आसान है, हक़ीक़त में उतना ही मुश्किल भी है.
और तस्वीर का दूसरा पहलू ये भी है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के अपने ख़ेमे में इतनी जगह ही नहीं है कि उसमें मायावती की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को समाहित किया जा सके.
सत्तर सांसदों और 320 विधायकों के साथ किसी भी गठबंधन में मायावती के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वाजिब सीटें छोड़ना एक ख़ौफ़नाक़ अनुभव हो सकता.
इसके नतीजे भी उल्टे साबित हो सकते हैं.
जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात, पूरी हिंदी पट्टी से लोकसभा के लिए 273 सांसद चुने जाते हैं.
मौजूदा लोकसभा में इनमें से क़रीब 200 सीटें भारतीय जनता पार्टी के पास हैं.
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावी नतीजों और उत्तर प्रदेश में बसपा और समाजवादी पार्टी के संभावित गठजोड़ के मद्देनज़र इस बात की पूरी संभावना है कि भाजपा साल 2019 के आम चुनावों में 80 से 100 सीटें तक गंवाने जा रही है.
तेलंगाना में गठबंधन की आस और पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल या फिर तमिलनाडु में सीटें बढ़ने की उम्मीद से इन सीटों की चौथाई से ज़्यादा की भरपाई के आसार नहीं दिखते.
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की कामयाबी सबसे ज़्यादा स्पष्ट है. ये वो सूबा है जहां कांग्रेस के पास कोई भी ताक़तवर क्षत्रप नहीं था.
चावल वाले बाबा के तौर पर शोहरत, स्वीकार्यता, कल्याणकारी सरकारी योजनाओं की लंबी फ़हरिस्त लिए और नक्सल हिंसा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले रमन सिंह को एक स्पष्ट विजेता के तौर पर पेश किया जा रहा था.
लेकिन छत्तीसगढ़ के मतदाता इसे क़बूल करने के लिए तैयार नहीं थे और उन्होंने रमन सिंह की सरकार को नकार दिया.
अंदाज़ा लगाइए कि अगर बाक़ी देश के लोग भी छत्तीसगढ़ की तर्ज़ पर वोट करने लगे तो क्या होगा?
शायद वे इस बात पर ग़ौर ज़रूर करेंगे. चाहे वो संसदीय लोकतंत्र में यक़ीन रखने वाले हों या फिर व्यक्ति की लहर के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की उम्मीद रखने वाले लोग हों, दोनों ही को एहतियात बरतने की ज़रूरत है.
मुद्दे और भी हैं जिन्हें ध्यान से देखे जाने की ज़रूरत है.

Wednesday, November 28, 2018

جامعة البحرين الطبية تحتفل بتخريج طلابها

احتفلت الكلية الملكية للجراحين في أيرلندا- جامعة البحرين الطبية ( ) يوم أمس بتخريج أكثر من 100 طالب وذلك في حفل أقيم في حرم الجامعة في البسيتين. 
     وكان من ضمن هؤلاء طلاب في برامج البكالوريوس في الطب والتمريض بالإضافة إلى طلاب الماجستير في إدارة الرعاية الصحية وسلامة الجودة وطلاب الماجستير في إدارة الرعاية الصحية من معهد القيادة( ) الذي تستضيفه جامعة البحرين الطبية. وتم منح أطباء آخرين عضوية الكلية الملكية للجراحين في أيرلندا وعضوية الكلية الملكية للجراحين في طب الأسنان.
وقام السيد كينيث ميلي رئيس الكلية الملكية للجراحين في أيرلندا بتقديم الشهادات للخريجين. 
وقد حضر الحفل أكثر من 300 شخص من أساتذة وموظفي الجامعة وضيوف وكبار الشخصيات ومسؤولين حكوميين وعائلات الطلاب، بالإضافة إلى أعضاء في مجلس الكلية الملكية للجراحين في أيرلندا والإدارة العليا للكلية في دبلن.
  أعلنت المرشحة بالانتخابات النيابية عن الدائرة الخامسة بمحافظة العاصمة «دنيا فخراوي» كامل تأييدها ودعمها للمرشح النيابي السيد أحمد صباح السلوم، وحلت فخراوي ضيفة على مقر المرشح السلوم بالسلمانية وقالت إن برنامجها يصب في نفس الاتجاه والمسار الخاص بالسلوم وهو خدمة الناس والتركيز على فئات الشباب والمرأة والمتقاعدين، وخدمة الوطن بشكل أشمل وأعم.. وكانت فخراوي قد حلت في المرتبة الثالثة بالجولة الأولى من الانتخابات الحالية التي جرت يوم السبت الماضي وحصلت على 376 صوتا وتتمتع بثقل كبير في بعض المناطق داخل الدائرة.
وقالت فخراوي: «سأقف يوم السبت القادم في جولة الإعادة من الثامنة صباحا دعما للسلوم وسأسخر كل طاقتي لدعمه لأنه صاحب برنامج حقيقي ويسعى لخدمة الدائرة فعليا، أهدافنا مشتركنا، برنامجنا وطني يسعى لخدمة الناس، واتفقنا على خدمة البحرين وشعب البحرين، وأتمنى له كل التوفيق والنجاح في الجولة القادمة».
من جانبه أكد المرشح النيابي أحمد صباح السلوم أمام حشد من أنصاره في مقره الانتخابي بالسلمانية أن المنافسة مع المرشحة دنيا فخراوي كانت «منافسة نزيهة ومحترمة» ولم تلجأ إلى أي أساليب رخيصة في دعايتها، حتى شعر الجميع بأنها لم تكن منافسة انتخابية بقدر ما كانت صداقة بين أهل وجيران، اعتادوا على أخلاقيات البحرين التي توارثناها جيلا بعد جيل، ومحبة للوطن يتبارى فيها الجميع لخدمة الناس بشرف ونزاهة.
وتابع السلوم قائلا: «كل مؤيدي فخراوي هم أهلي وجيراني في الأول والأخير، وكل الوعود التي قطعتها لمؤيديها ستكون في رقبتي، لأنها صاحبة برنامج واقعي وعملي وكان هدفها خدمة الناس أيضا، وسأخدم الجميع حبا في أهل البحرين وفي وطني البحرين، إن شاء الله لن نفرق بين أهالي الدائرة بل سنعمل على خدمة الجميع بكل ما استطعنا من جهد وعمل مثابرة بما لا يخالف القانون والشرع والتقاليد التي تربينا عليها في ديرتنا».
وأكد السلوم أنه تم الاتفاق مع المرشحة المحترمة دنيا فخراوي بالفعل على العمل سويا في المرحلة القادمة حال وصولي للمجلس إن شاء الله، وقد أبدت كل التفهم والتعاون في هذا الصدد، بل في الحقيقة هي من بادرت أيضا بإبداء رغبة في خدمة الناس بشكل تطوعي ودون النظر إلى أي امتيازات.. وهذا ما نتمناه من الجميع وبابنا مفتوح للتعاون مع كل أبناء الدائرة بل كل أبناء البحرين، فهذه مباراة في حب البحرين ولن يخسر أحد إن شاء الله بل كلنا فائزون.
وردا على أسئلة الحضور وتعليقاتهم بأن بعض النواب يختفون بعد وصولهم إلى البرلمان، ويغلقون هواتفهم في وجه المواطنين ويتبرأون من وعودهم الانتخابية.. قال السلوم «إنه ليس بالشخص الذي سيتوارى خلف مكتبه وموظفيه بعد نجاحه، ولن تحتاجوا للاتصال بي والتوسل إلى الموظفين للحصول على موعد للقائكم، لأنني سأكون بينكم ومعكم، وخدماتكم إن شاء الله ستصل إليكم قبل أن تطلبوها فلن تضطروا إلى طلبها أو التوسل لأحد، وحاشا لله أن نترككم تتوسلون لأحد غير الله، أما الواجبات الاجتماعية والتواصل مع الناس فهذه تربينا عليها منذ كنا صغارا وشبابا، ونفعلها دون الحاجة لأن نكون نوابا أو في أي منصب، بل نفعلها قربى لله واحتراما لأواصر الجيرة وعلاقات الأهل».
وردا على تعليقات أخرى حول مستوى الخدمات الصحية والتعليمية وملف الوظائف.. قال السلوم «لن نتأخر عن خدمة أي مواطن طالما في استطاعتنا مساعدته وتقديم يد العون له، ولكن نحن سنعتمد أساليب منهجية علمية في تنفيذ برنامج العمل الانتخابي الذي يبدأ بحصر بيانات أهالي الدائرة (أعمارهم ومؤهلاتهم ونوعهم)، ومن ثم مطالبهم واحتياجاتهم، ثم عمل خطة عمل مفصلة لتلبية هذه المطالب بالتعاون مع القطاع الخاص والحكومة، ومتابعة التنفيذ بعد ذلك من خلال استخدام الأدوات النيابية.
وأشاد بالعلاقة بين الكلية الملكية للجراحين في أيرلندا ومملكة البحرين.

Monday, November 12, 2018

वाराणसी में पीएम मोदी बोले- पूर्वांचल और पूर्वी भारत जलमार्ग से अब बंगाल की खाड़ी से जुड़ गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी दौरे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वाराणसी में विभिन्न विकास परियोजनाओं की नींव रखी है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "इस बार मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे दीपावली के दिन बाबा केदारनाथ के दर्शन करने का अवसर मिला। अब बाबा विश्वनाथ की नगरी में, आपसे आशीर्वाद लेने का मौका मिला है। उत्तराखंड में, मैं माता भगीरथी की पूजा करके धन्य हुआ, तो आज यहां, अब से कुछ देर पहले मां गंगा के दर्शन भी किए।" 
उन्होंने कहा कि वाराणसी और देश, इस बात का गवाह बना है कि संकल्प लेकर जब कार्य समय पर सिद्ध किए जाते हैं, तो उसकी तस्वीर कितनी भव्य और कितनी गौरवमयी होती है। वाराणसी और देश, इस बात का गवाह बना है कि अगली पीढ़ी के इंफ्रास्ट्रक्चर की अवधारणा, कैसे ट्रांसपोर्ट के तौर-तरीकों का कायाकल्प करने जा रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि काशी के लिए, पूर्वांचल के लिए, पूर्वी भारत के लिए और पूरे भारतवर्ष के लिए, आज का ये दिन बहुत ऐतिहासिक है। 

इससे पहले, उन्होंने रामनगर में बने देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। मल्टी मॉडल टर्मिनल के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हेलीकॉप्टर गंगा में बने जेटी पर उतरा। यहां से वो पैदल चलते हुए बंदरगाह के टर्मिनल पर पहुंचे। 

वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामनगर में बने देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। मल्टी मॉडल टर्मिनल के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हेलीकॉप्टर गंगा में बने जेटी पर उतरा। यहां से वो पैदल चलते हुए बंदरगाह के टर्मिनल पर पहुंचे।

मां गंगा को प्रणाम कर पीएम मोदी ने मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन किया। उन्होंने वाराणसी से पश्चिम बंगाल के हल्दिया के बीच के जल परिवहन की शुरुआत भी की। उन्होंने देश के पहले कंटेनर कार्गो को हरी झंडी दिखाई। उनके साथ सीएम योगी ओर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी रहे। रामनगर में करीब 40 मिनट गुजारने के बाद पीएम मोदी पुनः एयरपोर्ट के लिए निकले। यहां से जनसभा स्थल वाजिदपुर के लिए पहुंच चुके हैं। वो यहां कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।

इससे पहले वाराणसी एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व सत्यपाल सिंह के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय ने उनका स्वागत किया।

Wednesday, October 10, 2018

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

डॉक्टर मनोज ने कहा, ''कौन किस वक़्त किस तरह से स्क्रीन देख रहा है ये उनके चुनाव पर निर्भर करता है. फिर चाहे टीवी हो, ऑनलाइन वेबसाइट्स हों या मोबाइल गेमिंग, जहां एक्शन होता है. लेकिन यही लोग जब नेटफ्लिक्स जैसी जगह पर जाते हैं तो आराम के लिए जाते हैं.''
दिल्ली में पढ़ाई कर रही मोनिका भी नेटफ्लिक्स देखती हैं.
अपनी दिलचस्पी के बारे में वो कहती हैं, ''जब आप मुझसे बात कर रहे हैं, तब भी मैं 'द पनिशर' देख रही हूं. इन साइट्स में कुछ देखने की सबसे अच्छी बात ये है कि आप एक साथ सारे एपिसोड देख सकते हैं. एचबीओ की सिरीज़ गेम ऑफ थ्रोन्स या टीवी की तरह आपको महीनों तक इंतज़ार नहीं करना होता है. लेकिन पूरी सिरीज़ एक बार में मिल जाने से दर्शकों की जो बेचैनी होती है, वो नहीं होती.''
अक्षय कहते हैं, ''टीवी में अगर कहीं रोने का सीन आने वाला है और माहौल बन रहा है तो टीवी का विज्ञापन उस माहौल को तोड़ देता है. ऑनलाइन स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स में ऐसा नहीं है.''
अक्षय ने बताया कि अगर सिरीज़ अच्छी है या अवसाद वाले दिन हैं तो 5 से लेकर 10 घंटे तक भी देख साइट्स पर वक़्त गुज़रता है.
बाहर के देशों में ऑनलाइन गेमिंग को मेंटल हेल्थ कंडीशन मान लिया गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गेमिंग को डिसॉर्डर माना है. इसमें सिर्फ़ ऑनलाइन वेबसाइट्स ही नहीं, सोशल मीडिया भी शामिल है.
डॉक्टर मनोज बताते हैं कि बाहर के देशों में भारत की तरह इस पर रिसर्च हो रही है.
महाराष्ट्र का यवतमाल ज़िला और इस ज़िले का पांढरकावड़ा इलाका. ये क्षेत्र इन दिनों एक बाघिन (मादा टाइगर) की वजह से परेशान है. इसका नाम है टी1, जो बीते कई दिनों से इस इलाके के लोगों और जानवरों के लिए मौत बनकर घूम रही है.
हैरानी की बात है कि पिछले कई दिनों से वन विभाग इस बाघिन को पकड़ने के लिए दिन-रात एक किए हुए है, लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही. फ़ॉरेस्ट रेंजर गश्त लगा रहे हैं, बंदूकों के साये में पहरेदारी चल रही है, लेकिन बाघिन चकमा दे रही है.
प्रशासन ने अपनी कोशिशों के सिलसिले में सोमवार को एक और कड़ी जोड़ी है. इस बाघिन के शिकार के लिए केन कोरसो प्रजाति के दो कुत्तों को लगाया गया है. ये कुत्ते शिकारी माने जाते हैं.
ऐसा एक कुत्ता छह लाख रुपए का आता है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक ये दोनों कुत्ते हैदराबाद के शार्पशूटर नवाब शफ़त अली ख़ान के हैं, जो उनके पैलेस के बाड़े में रहते हैं.रिंसिपल चीफ़ कंज़रवेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ़) ए के मिश्रा ने टाइम्स से कहा, ''काफ़ी विचार-विमर्श के बाद केन कोरसो कुत्तों को फ़ील्ड में लगाया गया है. गोल्फ़र और डॉग ट्रेनर ज्योति रंधावा इन कुत्तों को संभाल रहे हैं. नवाब के बेटे असगर समेत कुछ और लोग भी इस ऑपरेशन में शामिल हैं.''
अधिकारियों का कहना है कि बाघिन दो घोड़ों को मार चुकी है, लेकिन वो 'चारे' के क़रीब नहीं गई. इसके अलावा कैमरा ट्रैप में भी उसकी तस्वीरें नहीं आ रहीं. उसे बेहोश करने के लिए पहले बाघिन की लोकेशन का पता करना ज़रूरी है और कुत्ते उसे खोज निकालने में काफ़ी मदद दे सकते हैं.
लेकिन वो कुत्ता कौन-सा है, जिसे बाघिन या बाघ के सामने उतारा जा रहा है. क्या कुत्तों की सारी प्रजातियां इतनी दमदार हैं कि उन्हें टाइगर से भिड़ाया जा सकता है. ये केन कोरसो कहां से आए हैं और इतने बहादुर कैसे हैं?
केन कोरसो का नाम कहां से आया? केन का मतलब है कुत्ता और लातिन भाषा में कोरसो के मायने हैं सुरक्षा करने वाला या प्रोटेक्टर. इसे इटैलियन मास्टिफ़ भी कहा जाता है. इटली में ये कई साल से गार्ड डॉग की भूमिका निभा रहा है.
केन कोरसो को संपत्ति, पशुओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है और आज भी कई इलाकों में ये जारी है. इतिहास को देखें तो ये नाइट वॉचमेन की भूमिका निभाते रहे हैं.
अमेरिकन केनेल क्लब ल 1994 में इस प्रजाति को इटैलियन केनल क्लब ने इतालवी कुत्तों की 14वीं प्रजाति के रूप में मान्यता दे दी है. साल 1997 में वर्ल्ड केनाइन ऑर्गेनाइज़ेशन ने इसे आंशिक रूप से स्वीकार किया था और दस साल बाद इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह मान्यता दे दी गई.
अमरीका में अमरीकन केनेल क्लब ने पहले साल 2010 में केन कोरसो को मान्यता दी थी. इस प्रजाति की शोहरत लगातार बढ़ रही है और दुनिया के कई देशों में इसे पुलिस डॉग के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है.
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के मुताबिक इन कुत्तों का कद 25 से 28 इंच होता है और जीवनकाल 9-12 साल. इन कुत्तों का वज़न 45-50 किलोग्राम तक होता है.
इन कुत्तों को स्मार्ट, ट्रेनिंग देने के योग्य, दबंग और आत्मविश्वास से भरा हुआ बताया जाता है. केन कोरसो का इतिहास रोमन दौर से जुड़ा है. इसका सिर काफ़ी बढ़ा होता है
20वीं सदी में दक्षिणी इटली के ग्रामीण फ़ार्म में जब जीवन में बदलाव हुआ तो कोरसो दुर्लभ होने लगे. 1970 के दशक के अंतिम दिनों में कुछ समूहों ने मिलकर इस कुत्ते की प्रजाति को बचाने का ज़िम्मा संभाला.

Friday, September 14, 2018

美国需“清醒面对”气候变化

卫报》周四报道说,欧盟要求美国在巴厘岛会议上清醒面对气候变化,并指出若不设定绑定性减排目标,下月由美国牵头召开的减排会谈将“没有意义”。 欧盟官员说,如果巴厘岛会议不规划一份“雄心勃勃的路线图”,下月布什总统召开的夏威夷气候变化会议将“毫无意义”。

欧洲环境专员迪马斯坚持认为,在周五会议结束时达成的任何协议中,发达国家于2020年前实现25%至40%的减排幅度均是十分必要的一部分。

但是作为唯一一个《京都议定书》框架外的主要工业国家的美国希望在会议中回避此类数据的讨论。路透社》周四引据印度尼西亚外交部长报道说,在巴厘岛举行的联合国气候变化大会上,各国代表将就拟订一份抗击全球暖化项目的纲领达成一致。依照该纲领,贫穷国家可通过保护森林获取资金。 此项目名为“减少发展中国家因森林砍伐而引起的排放”( )。依照该项目,森林保护将成为可易商品,将可通过碳交易为贫穷国家挣取数亿美元。

《彭博社》周二报道说,然而部分代表对“森林免于破坏”的提议表现犹豫。该提议的通过因美国和巴西代表的质疑受到阻碍,美国已表示拒绝向世界银行“森林碳合作基金”提供三亿美元资金。

在《彭博社》的一次采访中,美国总统布什的首席环境顾问詹姆士•康诺顿说道:“我们不认为(‘森林免于破坏’)提议应被各国一致授权通过,并质疑这对于某些国家是必要和正确的手段。 ”

原著民权益的推行者们也就此类提议进行了指责,并指出对如何保护森林有最深了解的通常是当地居民。“地球之友”在一份声明中说:“此提议明显缺乏对原著民权益的支持。”
环保者在巴厘指出说, 人类必须帮助动植物来适应如何生存在一个暖化的世界里。
美国大自然保护协会说,应该重点保护不同的最具复原力的社区。报道说,以往的保护都是集中在动植物保护最好的区域,但是它们不总是有最好适应能力的地区。

该协会总裁  厘会议期间说道: “自然在依赖我们。除了减排,我们需要帮助自然系统来适应气候变化以维系动植物的生存。中国网》周二报道说,一位中国科学家“万分悲痛”地证实,中国中部湖北省发现的一头江豚确已死亡。有关其死因的猜测众多,目前尚未有定论。 一位垂钓者在黄石城市公园发现一头成年雌性江豚后迅速向当地警察报告。

媒体报道说,解剖江豚查验死因的科学家称,江豚的肝脏和其他器官已呈黑色,水污染疑是江豚死因。报道称,进一步解剖正在开展中。

江豚的死亡在中国媒体界引起了强烈反响。报告称,垂钓者使用的电流可能造成了此悲剧,另称该江豚可能因受困于江流而受伤死亡。
新华社报道说,中国国家环保总局在等待对山东威海乳山有争议的核电项目的生态影响进行评估。早期有报道说,该国家环境监管机构反对这一项目。
国家环保总局副局长吴晓清说;“我们没有在阻止这一项目的进行,而是在等着对它的环境影响进行评估。

乳山核电站的建设因太接近被称为中国最美的一海滩而遭到了当地居民的反对。

该项目的一高级官员说,他们已经在当地居民中征求对该项目的意见。该电站不是那么可怕,居民应该已对它有所了解。

Thursday, September 6, 2018

联合国发表气候文本草案

据路透社报道,联合国发表了新的“后 气候条约”第一稿谈判案文,以帮助消除富国在温室气体减排上存在的巨大分歧。篇幅长达68页的两份文件还针对核能、排放权交易、林业、运输或航空和其他问题, 提出了供讨论的方案。

驻联合国的安提瓜和巴布达大使约翰·阿什担任案文汇编组的负责人,寻找督促富国削减排放量的办法。 “这是为了推动谈判进度,”他告诉路透社, “各方提出的意见之间存在很大分歧,我们不可能让每个人都满意。各方都不会在哥本哈根得到满意的结果(十二月),但我的出发点是要对地球的未来有利。 “

本周将公布一份单独的联合国文本,内容涵盖从全球2050年排放量目标,到以中、印为首的发展中国家可能采取的行动。所有文本将在六月一日于波恩举行的下届联合国气候谈判中进行讨论。

“文本将为各国政府提供从基本到详实的方案,以确认他们认可与否,及如何就分歧达成共识。”联合国气候变化秘书长伊沃德布尔告诉路透社的记者。

对于发达国家在贫困国家进行(碳交易)的绿色投资,该文件概述了发达国家索要碳交易信贷的可能途径。一些国家希望这种信贷能扩大到核电厂建设和碳捕获与储存的项目之中,而另一些国家则强烈反对。文件还列举了关于如何解释发达国家林业或土地使用变化,及欧盟建议在碳交易方案中增加国际航运或航空的内容。
据法新社报道,数十个国家于上周五签署了一项有关船舶安全回收的新条约,但相关活动人士认为,这并不能改变搁浅船只的拆解之路。船舶是在海潮高处被丢弃后,在漂流到的海滩上遭到分解的。拆船工人时常接触石棉,汞和其他有害物质,而该条约是首个关于船只拆卸的协议。

国际海事组织( )公约要求船东在把船送去回收前,需提供一张船上有害物质的明细清单。目前拆船活动主要在中国、土耳其和南亚地区进行, 而往往负责操作的是那些不熟练的工人和不受保护的移民。

“拆船平台”是一个非政府组织,其总监茵维尔德·简森称,“今天通过的船舶回收新公约不会停止发展中国家对有毒船舶的拆解,反而会使印度、巴基斯坦和孟加拉国的那些臭名昭著的行为合法化。实际上它给这样的剥削行为带来了好处,反倒惩罚了那些投资安全和清洁回收方法的公司。”

大部分拆船工作均在发展中国家的软沙滩上完成,在那里几乎或根本没有重型起重设备及紧急车辆。工人因此面临很高的风险,其中许多还是童工。

尽管100多个环境和人权团体已经敦促海事组织禁止对搁浅船舶作业,联合国相关机构却为协议辩护称,成员国面对的是处理一个价值数百万美元的产业,其中中间商以吨为单位支付船东,并通过转售回收后的材料赚回差价。

中国、巴西、澳大利亚、南非及其他62个国家已陆续签署协议。
据路透社报道,一份提交给联合国的新报告称,由于受到气候变化的影响,不发达国家亟需约20亿美元来应对这一严重威胁。斯德哥尔摩的气候变化委员会称,这些基金将用来扶助那些最脆弱的国家,主要是非洲国家和小岛国。

据悉,联合国秘书长潘基文在会议上指出,干涝、暴风、林火和冰川消融等现象对贫穷国家的影响最大。他说,可以通过以社区为单位的简单保护措施,如提前预警系统、灾害规划、提高对农作物和土地管理等来挽救人的生命。

“数十亿的人们正处于危险之中,”潘基文说,“这就是为什么适应气候议题是新的气候谈判中的关键因素。”

该气候变化委员会的报告呼吁捐赠者立即调动10亿到20亿美元,主张各国需要以最低的交易成本,从多个渠道获取和分配资金。瑞典国际发展合作部部长兼气候变化委员会主席  指出,消除贫困和气候变化是“不可分割”的。

将于12月举办的联合国哥本哈根气候大会已进入倒数阶段,潘基文敦促联合国成员达成2012年后减少二氧化碳排放的协议,提倡可持续发展,帮助最脆弱的国家应对气候变化。

Monday, September 3, 2018

गिरता रुपया-चढ़ता तेल, आप पर कितना असर

भारतीय रुपये में गिरावट का दौर जारी है. रुपया सोमवार को डॉलर के मुक़ाबले 21 पैसे टूट गया. अब अमरीकी डॉलर ने रुपये के मुक़ाबले रिकॉर्ड ऊंचाई ( .21) हासिल कर ली है.
वहीं पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें भी नई ऊंचाई पर हैं. इंडियन ऑयल की ओर से एसएमएस के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 79.15 रुपये और मुंबई में 86.56 रुपये तक पहुंच गई. sex
वहीं दिल्ली में एक लीटर डीज़ल 71.15 रुपये और मुंबई में 75.54 रुपये की कीमत पर बिका.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सोमवार को रुपये में डॉलर के मुक़ाबले रिकॉर्ड गिरावट देखी गई और ये 71.21 पर बंद हुआ. यानी अब एक अमरीकी डॉलर के लिए 71.21 रुपये देने होंगे.
रुपये में गिरावट और पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमत के बीच अर्थशास्त्री 'महंगाई बढ़ने का अनुमान जाहिर कर रहे हैं'.
भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत ने अप्रैल से जून 2018 यानी बीती तिमाही के दौरान 8.2 फ़ीसदी की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है. पिछली तिमाही में ये दर 7.7 फ़ीसदी थी.
ऐसे में भारतीय मुद्रा लगातार कमज़ोर क्यों हो रही है, इस सवाल के जवाब में अर्थशास्त्री कई कारण गिना रहे हैं.
अर्थशास्त्री आकाश जिंदल कहते हैं, " दुनिया की कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा डॉलर के मुक़ाबले कमजोर हो रही हैं. तुर्की और अर्जेंटीना जैसे देशों की मुद्रा में गिरावट का दौर जारी है."
वो अमरीका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर को भी रुपये की गिरावट से जोड़कर देखते हैं.
जिंदल कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को भी रुपये की कमजोरी की वजह बताते हैं. सोमवार को एक बैरल ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 78 डॉलर तक पहुंच गई.
वो कहते हैं, "कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत का असर भी रुपये पर हुआ है. हालात अगर ऐसे ही बने रहे तो डॉलर के मुक़ाबले रुपया और गिर सकता है."
भारतीय अर्थव्यवस्था, बाज़ार और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत पर नज़र रखने वाले विश्लेषक रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत को पेट्रोल और डीज़ल के दाम में इजाफे की अहम वजह बता रहे हैं.
अर्थशास्त्री आकाश जिंदल भी इस आकलन को सही ठहराते हैं.
वो कहते हैं, "कच्चे तेल की ऊंची कीमत, डॉलर का ऊंचाई पर होना और केंद्र सरकार की ओर से लगाए कर की वजह से तेल की कीमत चढ़ रही हैं. इसी सरकार के कार्यकाल में जब कच्चे तेल की कीमत कम थीं, तब सरकार लगातार कर बढ़ाती गई. लेकिन अब वो कर कम नहीं किए गए हैं."
रुपये में गिरावट और तेल महंगा होने का असर आपकी जेब पर भी दिख सकता है. अर्थशास्त्रियों की राय है कि इससे आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होगा.
अर्थशास्त्री आकाश जिंदल कहते हैं, "इसके असर से महंगाई बढ़ सकती है. डीज़ल महंगा होने से किसानों की तकलीफ बढ़ती है. कमाई और वेतन उस हिसाब से नहीं बढ़ रहे हैं."
बढ़ती महंगाई का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है. sexy
जिंदल कहते हैं, "आर्थिक पहलू की बात करें तो महंगाई में इजाफे से सरकारी घाटा बढ़ सकता है. आज 8.2 फीसदी जीडीपी ग्रोथ पर खुशी जाहिर की जा रही है लेकिन महंगाई बढ़ी तो इस पर भी असर हो सकता है. चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है."
जर्मनी के पूर्वी शहर केमनिट्ज़ में नस्लभेद के विरोध में हुए एक कंसर्ट में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया.
सोमवार रात हुए कंसर्ट में करीब 65 हज़ार लोग मौजूद थे.
बीते महीने के आखिर में 35 साल के एक व्यक्ति पर चाकू से हमला किया था. इस हमले में उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में दो प्रवासियों की पहचान संदिग्धों के रुप में की गई है. उसके बाद से इस शहर में दक्षिणपंथियों ने रैलियां निकाली हैं.
सोमवार को हुए कंसर्ट में पंक और हिप हॉप बैंड ने कार्यक्रम पेश किए. कंसर्ट में मौजूद कई लोग 'नाज़ियों को बाहर करो' जैसे नारे लगा रहे थे.
कार्यक्रम में हिस्सा लेने के इच्छुक सभी लोगों को जगह मिल सके इसके लिए आयोजकों को कंसर्ट की जगह बदलनी पड़ी. sexy
कंसर्ट की शुरुआत चाकू हमले के पीड़ित के लिए एक मिनट का मौन रखकर हुई.
इसके बाद क्राफ्टक्लब के एक गायक ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया.
उन्होंने कहा, " हम नासमझ नहीं हैं. हम इस भ्रम में नहीं हैं कि आप एक कसंर्ट का आयोजन करके दुनिया को बचा सकते हैं. लेकिन कई बार ये दिखाना अहम होता है कि आप अकेले नहीं हैं "
जिस वक्त कंसर्ट जारी था, उसी दौरान स्थानीय पुलिस ने जानकारी दी कि उन्होंने शनिवार के प्रदर्शन के दौरान एक पत्रकार पर हमला करने के मामले में एक संदिग्ध को गिरफ़्तार किया है. sex
इसके पहले सोमवार को एक प्रवासी को अपनी पूर्व जर्मन प्रेमिका की हत्या के मामले में आठ साल से ज़्यादा की सज़ा सुनाई गई. माना जाता है कि सजा पाने वाला व्यक्ति अफ़ग़ान मूल का है.
इस घटना को लेकर पूरे देश में गुस्सा देखा गया था.

Saturday, September 1, 2018

深陷指责 哥斯达黎加中资石油项目停工

这一备受争议的炼油项目将会给哥斯达黎加在2021年打造世界第一个“碳中性”国家的计划沉重一击。

该项目由哥斯达黎加国家石油石油公司( )与中国石油天然气集团公司(中石油)合作开发。中国国家开发银行为该项目提供9亿美元的贷款。 方面曾表示,该冶炼厂扩建成后每年最多可以为哥斯达黎加节省4100万美元,而且该项目也是为了顺应石油运输环节的需要而建立的。

然而,据哥斯达黎加网络报纸C 期的一篇报道显示,有评论人士对这一观点进行了驳斥,认为该项目与哥斯达黎加计划在2021年成为世界首个碳中和国家的减排目标背道而驰。

“现在,不光国内专家在大声疾呼新的炼油厂会给我们国家环境带来问题,国际权威机构也认识到该项目与环境目标相矛盾的地方。

拉丁美洲气候行动网络协调员表示,[除了该项目]还有很多其它能够确保碳中和的备选方案,虽然这些方案有可能需要对电网和能源消费作出调整。他们希望,在选择扩建炼油厂这个代价高昂、只会扩大石油燃料消耗的方案之前,能够对所有备选方案都进行详细的评估。”

虽然广受诟病,该项目依然在五月份获得了政府的批准,并且获得了多数部门领导的公开支持。环境能源部长雷内•卡斯特罗曾宣称,“没有其它能够解决我国石油运输问题的可行方案了” 。

然而,上周四,负责公共事业开支审核的国家审计署下令暂时中止该项目后,局势却发生了180度的转变。对于该中止令,哥斯达黎加报纸Prensa Libre上刊登的一篇报道中给出的解释是:

对于哥斯达黎加国家石油公司(  )与中油国际( )共同组建的Soresco公司,审计署认为,该项目存在‘违反《合资公司协议》第5.02项条款的行为……因为负责该项目可行性研究的是中石油关联企业。哥斯达黎加法律明令禁止此类行为。’
审计署还指出,可行性报告中存在一系列不足之处……最严重的问题就是“报告中并未包括对改造整体成本的估计,但却计入了所有收入,因此其提出的16.28%的利润率有虚高之嫌,”

有关该项目违规的指控有可能会给相关各方带来损失。据 报上周六的另一篇文章报道,消息宣布后不久,哥斯达黎加国家石油公司( )负责人便辞职,目前似乎已经离开该国。
虽然消息周四下午一经披露后,环境能源部长雷内•卡斯特罗就曾表示,哥斯达黎加国家石油公司总裁比利亚洛沃斯已经不在国内,但传言认为,他目前仍在国内。然而,公司发言人何塞•马里奥•古斯曼否认了这一传言,声称比利亚洛沃斯确实身在国外。

作为中美洲地区最大的贸易伙伴,中国在哥斯达黎加的形象有可能会受这一事件的影响。目前为止,中国官方虽然声称不想介入私营企业争端,但是对该企业却一直持支持的态度。

‘中国政府希望哥斯达黎加国家石油公司与中石油能够尽快解决这一问题,能够克服本周四炼油厂扩建升级项目所面临的阻碍。

Thursday, August 16, 2018

加拿大森林大火:气候变化恐是罪魁祸首

二,一场前所未有的五月森林大火席卷了加拿大艾伯塔省的麦克莫里堡市,当地不得不进行了该省有史以来最大规模的人员疏散。高温大风加剧了火势蔓延,风向在最后一分钟改变了方向,才使得石油重镇麦克莫里堡的大部分地区免于被大火吞噬。

此前,北半球大陆北部边界沿线已多次出现
森林火警险情,而人们认为这可能与全球气候变化有关。由于地球不断变暖,随着春季积雪融化,温度上升,类似这样的火灾会越来越多,严重程度也会越来越高。

2016年5月3日,加拿大艾伯塔省麦克莫里堡市南部的一处工业区,大火正在熊熊燃烧。(加拿大广播公司新闻提供,路透社发布)

艾伯塔大学森林火灾研究员麦克·弗兰尼根(  )说:“我们曾预测,人为原因导致的气候变化将影响林火动态,这次的大火恰好证明了这一点。”

上周二,大火开始自西向东肆虐,艾伯塔北部总面积6.1万平方公里的麦克莫里堡市至少有一个街区已夷为平地。当地气温更是直逼90华氏度——较往年同期高了40华氏度(22摄氏度)——而当天下午的大风则加剧了火情蔓延。火灾过境之处仿佛世界末日一般,林木好像被点着的火柴或者闪烁的急救灯,城内及周边 8万居民仓皇向南向北撤离。

出入城区只有一条路,路两边火光四起,浓烟滚滚,遮天蔽日,人们白天驾车逃离却感觉像是在黄昏。


《环球邮报》记者在麦克莫里堡市邻近的榭湖镇疏散中心遇到了逃难的丹·比克福德(  ),他说:“当时烟简直太大了,坐在车里向外看,能见度都不到两英尺。”

这样的撤离场景让我们想起了去年美国加利福尼亚州米德尔顿的河谷大火。那次灾难的起因跟麦克莫里堡类似,最终造成加州湖区县和索诺玛县等地约2000多幢房屋被毁。尽管麦克莫里堡居民受灾程度也很严重,但好在目前为止尚无人员死亡报告。

麦克莫里堡市消防队长达比·艾伦(接受加拿大广播公司采访时表示,这周二是他职业生涯中最黑暗的一天。虽然具体损毁程度还有待统计,但初步报告显示,其中一个街区的居民房屋有八成已经被毁。由于高温干旱天气还将持续,预计周三火情仍然难以缓解。

麦克莫里堡发生的这一切恰好证明了气候变化对森林野火季节的影响。去年冬季降水不足,积雪过少且在春季温度上升后迅速消融,给野火肆虐留下了充足的“沃土”。

Sunday, August 12, 2018

कितने अंधविश्वासी थे मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब आलमगीर?

अमरीकी इतिहासकार ऑड्री ट्रश्की कहती हैं कि तमाम मुग़ल बादशाहों में औरंगज़ेब आलमगीर में उनकी ख़ास दिलचस्पी की वजह उनके बारे में दुनिया भर में फैली हुई ग़लतफ़हमियाँ हैं.
मुग़ल और मराठा इतिहास पर कई ग्रन्थ लिखने वाले ख्यातिप्राप्त इतिहासकार सर जादूनाथ सरकार ने अगर औरंगज़ेब को अपनी नज़र से देखा, तो जवाहर लाल नेहरू ने अपनी नज़र से.
इनके अलावा शाहिद नईम ने भी औरंगज़ेब आलमगीर के मज़हबी पहलू पर ही ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर दिया.
लेकिन 'औरंगज़ेब द मैन एंड द मिथ' नाम की किताब की लेखिका ऑड्री ट्रश्की ने बीबीसी को बताया कि अगर रवादारी (सहिष्णुता) के लिहाज़ से देखा जाए तो इतिहास के सभी शासक ग़ैर रवादार (असहिष्णु) रहे हैं.
ऑड्री ट्रश्की कहती हैं कि औरंगज़ेब के बारे में ग़लतफ़हमियाँ ज़्यादा हैं और उन्हें हवा देकर मौजूदा दौर में मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाया जा रहा है.
लेखिका के मुताबिक़, भारत में इस समय असहिष्णुता बढ़ रही है. वो मानती हैं कि शायद इसी वजह से हैदराबाद में उनके लेक्चर को भी रद्द कर दिया गया जो 11 अगस्त को होना था.
ऑड्री बताती हैं कि इसके विपरीत औरंगज़ेब बादशाह के शासनकाल के ब्राह्मण और जैन लेखक औरंगज़ेब की तारीफ़ें करते हैं. उन्होंने जब फ़ारसी भाषा में हिंदुओं की पवित्र किताब 'महाभारत' और 'रामायण' को पेश किया तो उसे औरंगज़ेब को समर्पित किया.
ऑड्री ने अपनी किताब में लिखा है कि औरंगज़ेब ने अगर होली पर सख़्ती दिखाई तो उन्होंने मुहर्रम और ईद पर भी सख़्ती का प्रदर्शन किया.
अगर उन्होंने एक दो मंदिर तोड़े, तो कई मंदिरों को बड़ा दान भी दिया.
वो कहती हैं, "अलग-अलग इतिहासकारों ने औरंगज़ेब को अपने चश्मे से देखने की कोशिश की है."
ऑड्री के अनुसार, औरंगज़ेब ने ख़ुद को एक अच्छे मुसलमान के तौर पर पेश किया या फिर उनकी हमेशा एक अच्छा मुसलमान बनने की कोशिश रही, लेकिन उनका इस्लाम आज का कट्टर इस्लाम नहीं था. औरंगज़ेब बहुत हद तक सूफ़ी थे और किसी हद तक तो वो अंधविश्वासी भी थे.
औरंगज़ेब के अंधविश्वासी होने का उदाहरण देते हुए ऑड्री बताती हैं कि तमाम मुग़ल बादशाहों के यहाँ ज्योतिष के विशेषज्ञ हुआ करते थे.
औरंगज़ेब के दरबार में भी हिंदू-मुसलमान, दोनों धर्मों के ज्योतिष थे और वो उनसे राय लिया करते थे.
उन्होंने औरंगजेब के एक सिपाही भीमसेन सक्सेना के हवाले से बताया कि दक्षिण भारत में एक बार जहां उनका कैंप था वहाँ बाढ़ आ गई और यह आशंका ज़ोर पकड़ने लगी कि बाढ़ के कारण शाही कैंप को नुक़सान हो सकता है तो उन्होंने क़ुरान की आयतें लिखकर बाढ़ के पानी में डलवाईं, जिसके बाद बाढ़ के पानी में कमी आ गई और ख़तरा टल गया.
याद रहे कि इसी तरह की एक घटना इस्लाम के दूसरे ख़लीफ़ा हज़रत उमर के काल में भी हुई थी जिसका ज़िक्र कई जगह मिलता है कि कैसे उन्होंने मिस्र की नील नदी के नाम पत्र लिखा था.
कहा जाता है कि मिस्र का इलाक़ा जब इस्लाम के अधीन आया तो वहाँ के तत्कालीन गवर्नर अम्र बिन-अल-आस को पता चला कि वहाँ एक सुंदर युवती की सजा-संवार कर हर साल नील नदी के नाम पर बलि दी जाती है ताकि नदी धाराप्रवाह बहती रहे और लोग इससे लाभान्वित होते रहें.
लेकिन इस्लामी सरकार ने इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया और फिर नदी का पानी वास्तव में सूख गया. लोगों ने सोचा कि उन पर नदी का प्रकोप हुआ है. यह ख़बर जब ख़लीफ़ा उमर फ़ारूक़ को दी गई तो उन्होंने नील नदी के नाम पत्र लिखा जिसमें उन्होंने यह लिखा कि 'ऐ नदी अगर तू अपने अधिकार से बहती है तो मत बह, लेकिन अगर तू अल्लाह के हुक्म से चलती है तो फिर से बहना शुरू कर दे'.
ऐसा कहा जाता है कि नील नदी में पहले से अधिक पानी आया और उसके बाद वह कभी नहीं सूखी.
ऑड्री ट्रश्की ने इस घटना पर कहा कि हो सकता है कि औरंगज़ेब को भी यह बात पता रही हो और उन्होंने उसके बाद ही ऐसा किया हो.
लेकिन फिर उन्होंने कहा कि एक आधुनिक इतिहासकार होने के नाते मुझे इस पर विश्वास नहीं है लेकिन औरंगज़ेब को उस पर विश्वास था क्योंकि उन्होंने लोगों के सामने इस पर अमल किया और यह दिखाने की कोशिश की कि इस तरह बाढ़ के प्रकोप से बचा जा सकता है.
उन्होंने बताया कि औरंगज़ेब हिंदू और मुसलमान, दोनों क़िस्म के ज्योतिषों से सलाह-मशविरा भी करते थे और कभी-कभार उनके मशविरे पर अमल भी करते थे.
ऑड्री ट्रश्की ने दूसरे मुग़ल बादशाहों के मुक़ाबले औरंगज़ेब की श्रेष्ठता का ज़िक्र करते हुए कहा कि वो सारे मुग़ल बादशाहों में सबसे ज़्यादा धार्मिक थे. उन्हें पूरी क़ुरान याद थी. नमाज़ और इबादत के वो सबसे ज़्यादा पाबंद थे.
औरंगज़ेब पर ये आरोप लगाए जाते हैं कि उन्हें कलाओं, ख़ासकर संगीत से नफ़रत थी. लेकिन औरंगज़ेब के बारे में कुछ क़िस्से ऐसे हैं जो इस बात को सही नहीं मानते.
हालांकि, एक अन्य इतिहासकार कैथरीन ब्राउन ने 'डिड औरंगज़ेब बैन म्यूज़िक' यानी 'क्या औरंगज़ेब ने संगीत पर प्रतिबंध लगाया था' शीर्षक से लिखे एक लेख में दावा किया कि औरंगज़ेब अपनी ख़ाला (मौसी) से मिलने बुरहानपुर गए थे जहाँ हीराबाई ज़ैनाबादी को देखकर वो अपना दिल दे बैठे थे. हीराबाई एक नर्तकी और गायिका थीं.
ऑड्री भी बताती हैं कि औरंगज़ेब को जितना कट्टर पेश किया जाता है वो वैसे नहीं थे. उनकी कई हिंदू बेगमें थीं और मुग़लों की हिंदू बीवियाँ हुआ करती थीं.
उन्होंने बताया, "अपने आख़िरी दिनों में औरंगज़ेब अपने सबसे छोटे बेटे कामबख़्श की माँ उदयपुरी के साथ रहते थे जो एक गायिका थीं. उन्होंने मृत्युशय्या से कामबख़्श को एक ख़त लिखा था जिसमें उन्होंने ज़िक्र किया कि उनकी माँ उदयपुरी बीमारी की हालत में उनके साथ हैं और वो मौत तक उनके साथ ही रहेंगी."
बताया जाता है कि औरंगज़ेब की मौत के चंद महीने बाद 1707 की गर्मियों में उदयपुरी की भी मौत हो गई.