Thursday, August 16, 2018

加拿大森林大火:气候变化恐是罪魁祸首

二,一场前所未有的五月森林大火席卷了加拿大艾伯塔省的麦克莫里堡市,当地不得不进行了该省有史以来最大规模的人员疏散。高温大风加剧了火势蔓延,风向在最后一分钟改变了方向,才使得石油重镇麦克莫里堡的大部分地区免于被大火吞噬。

此前,北半球大陆北部边界沿线已多次出现
森林火警险情,而人们认为这可能与全球气候变化有关。由于地球不断变暖,随着春季积雪融化,温度上升,类似这样的火灾会越来越多,严重程度也会越来越高。

2016年5月3日,加拿大艾伯塔省麦克莫里堡市南部的一处工业区,大火正在熊熊燃烧。(加拿大广播公司新闻提供,路透社发布)

艾伯塔大学森林火灾研究员麦克·弗兰尼根(  )说:“我们曾预测,人为原因导致的气候变化将影响林火动态,这次的大火恰好证明了这一点。”

上周二,大火开始自西向东肆虐,艾伯塔北部总面积6.1万平方公里的麦克莫里堡市至少有一个街区已夷为平地。当地气温更是直逼90华氏度——较往年同期高了40华氏度(22摄氏度)——而当天下午的大风则加剧了火情蔓延。火灾过境之处仿佛世界末日一般,林木好像被点着的火柴或者闪烁的急救灯,城内及周边 8万居民仓皇向南向北撤离。

出入城区只有一条路,路两边火光四起,浓烟滚滚,遮天蔽日,人们白天驾车逃离却感觉像是在黄昏。


《环球邮报》记者在麦克莫里堡市邻近的榭湖镇疏散中心遇到了逃难的丹·比克福德(  ),他说:“当时烟简直太大了,坐在车里向外看,能见度都不到两英尺。”

这样的撤离场景让我们想起了去年美国加利福尼亚州米德尔顿的河谷大火。那次灾难的起因跟麦克莫里堡类似,最终造成加州湖区县和索诺玛县等地约2000多幢房屋被毁。尽管麦克莫里堡居民受灾程度也很严重,但好在目前为止尚无人员死亡报告。

麦克莫里堡市消防队长达比·艾伦(接受加拿大广播公司采访时表示,这周二是他职业生涯中最黑暗的一天。虽然具体损毁程度还有待统计,但初步报告显示,其中一个街区的居民房屋有八成已经被毁。由于高温干旱天气还将持续,预计周三火情仍然难以缓解。

麦克莫里堡发生的这一切恰好证明了气候变化对森林野火季节的影响。去年冬季降水不足,积雪过少且在春季温度上升后迅速消融,给野火肆虐留下了充足的“沃土”。

Sunday, August 12, 2018

कितने अंधविश्वासी थे मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब आलमगीर?

अमरीकी इतिहासकार ऑड्री ट्रश्की कहती हैं कि तमाम मुग़ल बादशाहों में औरंगज़ेब आलमगीर में उनकी ख़ास दिलचस्पी की वजह उनके बारे में दुनिया भर में फैली हुई ग़लतफ़हमियाँ हैं.
मुग़ल और मराठा इतिहास पर कई ग्रन्थ लिखने वाले ख्यातिप्राप्त इतिहासकार सर जादूनाथ सरकार ने अगर औरंगज़ेब को अपनी नज़र से देखा, तो जवाहर लाल नेहरू ने अपनी नज़र से.
इनके अलावा शाहिद नईम ने भी औरंगज़ेब आलमगीर के मज़हबी पहलू पर ही ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर दिया.
लेकिन 'औरंगज़ेब द मैन एंड द मिथ' नाम की किताब की लेखिका ऑड्री ट्रश्की ने बीबीसी को बताया कि अगर रवादारी (सहिष्णुता) के लिहाज़ से देखा जाए तो इतिहास के सभी शासक ग़ैर रवादार (असहिष्णु) रहे हैं.
ऑड्री ट्रश्की कहती हैं कि औरंगज़ेब के बारे में ग़लतफ़हमियाँ ज़्यादा हैं और उन्हें हवा देकर मौजूदा दौर में मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाया जा रहा है.
लेखिका के मुताबिक़, भारत में इस समय असहिष्णुता बढ़ रही है. वो मानती हैं कि शायद इसी वजह से हैदराबाद में उनके लेक्चर को भी रद्द कर दिया गया जो 11 अगस्त को होना था.
ऑड्री बताती हैं कि इसके विपरीत औरंगज़ेब बादशाह के शासनकाल के ब्राह्मण और जैन लेखक औरंगज़ेब की तारीफ़ें करते हैं. उन्होंने जब फ़ारसी भाषा में हिंदुओं की पवित्र किताब 'महाभारत' और 'रामायण' को पेश किया तो उसे औरंगज़ेब को समर्पित किया.
ऑड्री ने अपनी किताब में लिखा है कि औरंगज़ेब ने अगर होली पर सख़्ती दिखाई तो उन्होंने मुहर्रम और ईद पर भी सख़्ती का प्रदर्शन किया.
अगर उन्होंने एक दो मंदिर तोड़े, तो कई मंदिरों को बड़ा दान भी दिया.
वो कहती हैं, "अलग-अलग इतिहासकारों ने औरंगज़ेब को अपने चश्मे से देखने की कोशिश की है."
ऑड्री के अनुसार, औरंगज़ेब ने ख़ुद को एक अच्छे मुसलमान के तौर पर पेश किया या फिर उनकी हमेशा एक अच्छा मुसलमान बनने की कोशिश रही, लेकिन उनका इस्लाम आज का कट्टर इस्लाम नहीं था. औरंगज़ेब बहुत हद तक सूफ़ी थे और किसी हद तक तो वो अंधविश्वासी भी थे.
औरंगज़ेब के अंधविश्वासी होने का उदाहरण देते हुए ऑड्री बताती हैं कि तमाम मुग़ल बादशाहों के यहाँ ज्योतिष के विशेषज्ञ हुआ करते थे.
औरंगज़ेब के दरबार में भी हिंदू-मुसलमान, दोनों धर्मों के ज्योतिष थे और वो उनसे राय लिया करते थे.
उन्होंने औरंगजेब के एक सिपाही भीमसेन सक्सेना के हवाले से बताया कि दक्षिण भारत में एक बार जहां उनका कैंप था वहाँ बाढ़ आ गई और यह आशंका ज़ोर पकड़ने लगी कि बाढ़ के कारण शाही कैंप को नुक़सान हो सकता है तो उन्होंने क़ुरान की आयतें लिखकर बाढ़ के पानी में डलवाईं, जिसके बाद बाढ़ के पानी में कमी आ गई और ख़तरा टल गया.
याद रहे कि इसी तरह की एक घटना इस्लाम के दूसरे ख़लीफ़ा हज़रत उमर के काल में भी हुई थी जिसका ज़िक्र कई जगह मिलता है कि कैसे उन्होंने मिस्र की नील नदी के नाम पत्र लिखा था.
कहा जाता है कि मिस्र का इलाक़ा जब इस्लाम के अधीन आया तो वहाँ के तत्कालीन गवर्नर अम्र बिन-अल-आस को पता चला कि वहाँ एक सुंदर युवती की सजा-संवार कर हर साल नील नदी के नाम पर बलि दी जाती है ताकि नदी धाराप्रवाह बहती रहे और लोग इससे लाभान्वित होते रहें.
लेकिन इस्लामी सरकार ने इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया और फिर नदी का पानी वास्तव में सूख गया. लोगों ने सोचा कि उन पर नदी का प्रकोप हुआ है. यह ख़बर जब ख़लीफ़ा उमर फ़ारूक़ को दी गई तो उन्होंने नील नदी के नाम पत्र लिखा जिसमें उन्होंने यह लिखा कि 'ऐ नदी अगर तू अपने अधिकार से बहती है तो मत बह, लेकिन अगर तू अल्लाह के हुक्म से चलती है तो फिर से बहना शुरू कर दे'.
ऐसा कहा जाता है कि नील नदी में पहले से अधिक पानी आया और उसके बाद वह कभी नहीं सूखी.
ऑड्री ट्रश्की ने इस घटना पर कहा कि हो सकता है कि औरंगज़ेब को भी यह बात पता रही हो और उन्होंने उसके बाद ही ऐसा किया हो.
लेकिन फिर उन्होंने कहा कि एक आधुनिक इतिहासकार होने के नाते मुझे इस पर विश्वास नहीं है लेकिन औरंगज़ेब को उस पर विश्वास था क्योंकि उन्होंने लोगों के सामने इस पर अमल किया और यह दिखाने की कोशिश की कि इस तरह बाढ़ के प्रकोप से बचा जा सकता है.
उन्होंने बताया कि औरंगज़ेब हिंदू और मुसलमान, दोनों क़िस्म के ज्योतिषों से सलाह-मशविरा भी करते थे और कभी-कभार उनके मशविरे पर अमल भी करते थे.
ऑड्री ट्रश्की ने दूसरे मुग़ल बादशाहों के मुक़ाबले औरंगज़ेब की श्रेष्ठता का ज़िक्र करते हुए कहा कि वो सारे मुग़ल बादशाहों में सबसे ज़्यादा धार्मिक थे. उन्हें पूरी क़ुरान याद थी. नमाज़ और इबादत के वो सबसे ज़्यादा पाबंद थे.
औरंगज़ेब पर ये आरोप लगाए जाते हैं कि उन्हें कलाओं, ख़ासकर संगीत से नफ़रत थी. लेकिन औरंगज़ेब के बारे में कुछ क़िस्से ऐसे हैं जो इस बात को सही नहीं मानते.
हालांकि, एक अन्य इतिहासकार कैथरीन ब्राउन ने 'डिड औरंगज़ेब बैन म्यूज़िक' यानी 'क्या औरंगज़ेब ने संगीत पर प्रतिबंध लगाया था' शीर्षक से लिखे एक लेख में दावा किया कि औरंगज़ेब अपनी ख़ाला (मौसी) से मिलने बुरहानपुर गए थे जहाँ हीराबाई ज़ैनाबादी को देखकर वो अपना दिल दे बैठे थे. हीराबाई एक नर्तकी और गायिका थीं.
ऑड्री भी बताती हैं कि औरंगज़ेब को जितना कट्टर पेश किया जाता है वो वैसे नहीं थे. उनकी कई हिंदू बेगमें थीं और मुग़लों की हिंदू बीवियाँ हुआ करती थीं.
उन्होंने बताया, "अपने आख़िरी दिनों में औरंगज़ेब अपने सबसे छोटे बेटे कामबख़्श की माँ उदयपुरी के साथ रहते थे जो एक गायिका थीं. उन्होंने मृत्युशय्या से कामबख़्श को एक ख़त लिखा था जिसमें उन्होंने ज़िक्र किया कि उनकी माँ उदयपुरी बीमारी की हालत में उनके साथ हैं और वो मौत तक उनके साथ ही रहेंगी."
बताया जाता है कि औरंगज़ेब की मौत के चंद महीने बाद 1707 की गर्मियों में उदयपुरी की भी मौत हो गई.